होलिका दहन पर कहीं आप भी तो नहीं कर रहे हैं ये ग़लतियाँ?

देखते ही देखते रंगों का त्योहार होली फिर आने वाला है। खुशियों की बहार, मीठे पकवानों की खुशबू और चारों ओर रंगों की फुहार – होली का सेलिब्रेशन वाकई यादगार होता है। लेकिन होली की धूम मचने से एक दिन पहले होलिका दहन मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होता है। क्या आप जानते हैं होलिका क्यों मनाया जाता है? अगर नहीं तो आइए जानते हैं इस खास दिन के बारे में थोड़ाविस्तार से-

क्यों मनाते हैं होलिका दहन?

होलिका दहन की कहानी भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद और उनकी दुष्ट चाची होलिका से जुड़ी हुई है, कहते हैं कि होलिका को आग से बचने का वरदान मिला था और वो अपने इस वरदान का गलत फ़ायदा उठाते हुए प्रह्लाद को जलाने की कोशिश की लेकिन प्रह्लाद भगवान विष्णु के सच्चे भक्त था और उनकी भक्ति से खुश होकर भगवान विष्णु ने अपने परम भक्त प्रह्लाद को बचा लिया और होलिका खुद आग में जल गई। तबसे होलिका का पर्व मनाया जाता है ।और यही कारण है कि होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

होलिका दहन कैसे मनाते हैं?

होलिका दहन के शुभ दिन लोग सूखी लकड़ियों, उपलों और गोबर के उपलों का एक बड़ा ढेर बनाते हैं , जिसे होलिका कहा जाता है। शाम के समय, लोग होलिका के आसपास इकट्ठा होते हैं और पूजा-पाठ के बाद उसमें आग लगाते हैं। माना जाता है कि होलिका जलाने से बुराईयां भी जल कर नाश हो जाती हैं।
होलिका में लोग नारियल और गुड़ भी चढ़ाते हैं। होलिका जलाने के बाद लोग ढोल-ताशों की धुन पर नाचते गाते हैं भी और होलिका दहन का यह त्योहार भूत ही खुशी और उमंग का माहौल बना देती है।

होलिका दहन के बाद रंगों की खुमारी

होलिका दहन के अगले दिन होली का मुख्य त्योहार मनाया जाता है। इस दिन लोग जमकर रंग खेलते हैं और एक-दूसरे पर सूखे और गीले रंगों की बौछार करते हैं ,हर तरफ हंसी-खुशी का माहौल छाया रहता है। हर तरफ़ गुझिया पापड़ की बहार आई हुई होती है। कहा जाता है एस दिन गीले शिकवे भूलकर दुश्मन भी गले मिल जाते हैं। होलिका दहन और होली का त्यौहार हमें सीख देते हैं कि भले ही जीवन में कितनी भी बुराइयां आएं, अच्छाई हमेशा जीतती है और साथ ही यह त्योहार हमें आपसी प्यारऔर भाईचारे का संदेश भी देता है।

होलिका दहन के कुछ ज़रूरी टिप्स:

होलिका दहन के वक्त सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना चाहिए और बच्चों को होलिका से दूर रखना चाहिए और ऐसे कपड़े नहीं पहनना चाहिए जिसमें आग लगने का ख़तरा ज़्यादा हो।होली में रंग खेलते समय पानी की बर्बादी नहीं करनी चाहिए सूखे रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए।

तो फिर देर किस बात की? आइए, इस होली रंगों की खुमारी में सराबोर होकर खुशियां मनाएं और बुराईयों को ख़त्म करके आपसी प्यार, भाईचारे और पॉस्टिविटी का संदेश फैलाएं।
होली की शुभकामनाएं!

Leave a Comment